भारत में लखनऊ से ट्रेन द्वारा की जाने वाली सबसे अच्छी गर्मियों की यात्राएँ - वे जगहें जिनकी मैं वास्तव में सिफारिश करूँगा, सिर्फ़ यूँ ही किसी रैंडम लिस्टिकल वाली चीज़ें नहीं#

अगर आप लखनऊ में रहते हैं, तो आप पहले से जानते हैं कि यहाँ की गर्मियाँ काफ़ी बेरहम हो सकती हैं। अप्रैल के आखिर तक ही गर्मी अपने तेवर दिखाने लगती है, और मई तक आते-आते... बस, एसी भी कभी-कभी हार मान लेता है। तभी ट्रेन-ट्रिप के ख्याल शुरू होते हैं। और सच कहूँ, लखनऊ से सबसे बढ़िया छुटकारों में से कुछ वही हैं जो आप ट्रेन से कर सकते हैं, बिना पूरी चीज़ को किसी उलझे हुए एयरपोर्ट ड्रामे में बदले। मैंने समय के साथ इनमें से काफ़ी रूट किए हैं - कुछ दोस्तों के साथ, एक परिवार के साथ, और एक आधा-सोलो ट्रिप जहाँ मैंने ज़्यादातर स्टेशन की चाय पी और खिड़की के बाहर किसी फिल्मी किरदार की तरह देखता रहा। तो यह बस एक और “टॉप डेस्टिनेशंस” पोस्ट नहीं है। यह ज़्यादा ऐसा है जैसे अगर आप चाय पर किसी लखनऊ वाले यात्री से पूछें, “भाई, गर्मी से बचने के लिए ट्रेन से कहाँ निकलें?” - तो मैं यही कहूँगा।

और हाँ, एक छोटी-सी बात। लखनऊ से गर्मियों में ट्रेन से यात्राएँ तब सबसे अच्छी रहती हैं जब आप उम्मीदें वास्तविक रखें। स्कूल की छुट्टियों में ट्रेनों में बहुत भीड़ हो जाती है, तत्काल ऐसा लगता है जैसे 8 सेकंड में ही खत्म हो जाता है, और हिल स्टेशन अब कोई रहस्य नहीं रहे। लेकिन फिर भी, उत्तर भारत में ट्रेन यात्रा का एक ऐसा आकर्षण है जिसकी बराबरी कोई उड़ान नहीं कर सकती। मैदानों से तराई और फिर पहाड़ियों की ओर धीरे-धीरे बदलता दृश्य, स्टेशन के नाश्ते, कानों में पड़ती पारिवारिक बातचीत, चाय-चाय पुकारते फेरीवाले... ऐसा लगता है जैसे मंज़िल पर पहुँचने से पहले ही यात्रा शुरू हो जाती है। और यह मायने रखता है। सच में, बहुत ज़्यादा।

गर्मियों में लखनऊ से ट्रेन यात्राएं करना इतना समझदारी भरा क्यों है#

लखनऊ काफ़ी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, और यही इसका सबसे बड़ा फ़ायदा है। यहाँ से आप सही मायनों वाले हिल स्टेशनों तक, पहाड़ों के प्रवेश-द्वार जैसे शहरों तक, ठंडी नदी पट्टियों के पास स्थित आध्यात्मिक जगहों तक, और यहाँ तक कि उन कम-आंकी गई सैरगाहों तक भी पहुँच सकते हैं जहाँ सुबहें सुहानी होती हैं और शामें लगभग मेहरबान-सी लगती हैं। ट्रेनें आमतौर पर उड़ानों से सस्ती पड़ती हैं, सामान के साथ परिवारों के लिए कहीं ज़्यादा आसान होती हैं, और अगर आप स्लीपर या 3एसी समझदारी से बुक करें, तो सफ़र खुद भी थकाऊ नहीं लगता। ज़्यादातर रूट्स के लिए आईआरसीटीसी पहले से ज़्यादा सहज हो गया है, हालांकि हाँ, कभी-कभी यह अब भी सब्र की परीक्षा लेना पसंद करता है। सुरक्षा के लिहाज़ से, लखनऊ से उत्तराखंड की ओर, हिमाचल के प्रवेश-द्वारों की ओर, जम्मू की तरफ़, और पूर्वी यूपी के पहाड़ी-सीमा संपर्क मार्गों पर जाने वाले प्रमुख रूट आम तौर पर सक्रिय और लोकप्रिय रहते हैं, इसलिए अकेले यात्रा करने वाले, महिला यात्री और पारिवारिक समूह सभी इनका नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं। फिर भी, भारतीय यात्रा से जुड़ी सामान्य समझदारी हमेशा लागू होती है - अपने बैग लॉक रखें, किसी अनजान व्यक्ति से खाना न लें, होटल की जानकारी ऑफलाइन सेव रखें, और अगर संभव हो तो नए शहरों में दिन की रोशनी में पहुँचने की कोशिश करें।

मेरे गर्मियों के सफर का सामान्य नियम सीधा है: अगर किसी जगह तक पहुँचने के लिए एक ट्रेन और उसके बाद सड़क से एक छोटा-सा ट्रांसफर चाहिए, तो ठीक है। अगर वहाँ पहुँचने के लिए ट्रेन, बस, साझा जीप, खच्चर, और शायद किस्मत की दुआ भी चाहिए — तो मैं उसे बाद के लिए बचाकर रखता हूँ। लखनऊ से गर्मियों में सबसे अच्छे ट्रेन सफर वही हैं, जहाँ ट्रेन आपको इतना पास पहुँचा दे कि आखिरी हिस्सा आसानी से तय किया जा सके।

1) नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर के लिए काठगोदाम - शायद सबसे आसान क्लासिक छुट्टी#

यह वह विकल्प है जिसे मैं लगभग हर किसी को सबसे पहले सुझाता हूँ। आप लखनऊ से काठगोदाम तक ट्रेन लेते हैं, और वहाँ से पहाड़ों का सफर जल्दी शुरू हो जाता है। नैनीताल, भीमताल, सातताल, और मुक्तेश्वर की ओर जाने के लिए टैक्सियाँ और साझा कैब बाहर या आसपास आसानी से मिल जाती हैं। गर्मियों में यह मार्ग इतना अच्छा इसलिए काम करता है क्योंकि यह कई विकल्प देता है। अगर आपको चहल-पहल वाला बाज़ार, झील के नज़ारे, नौकाविहार, और पुराने ज़माने वाले हनीमून हिल स्टेशन जैसा माहौल चाहिए — तो नैनीताल जाइए। अगर आपको अधिक शांत माहौल चाहिए, तो भीमताल या सातताल जाइए। अगर आपको बाग़, खुले पहाड़ी दृश्य, और कम भीड़ चाहिए, तो मुक्तेश्वर बहुत सुंदर है।

लेकिन मैं सच कहूँ, तो मई-जून के चरम सीज़न में नैनीताल थोड़ा ज़्यादा भीड़भाड़ वाला हो सकता है। खूबसूरत, हाँ। शांतिपूर्ण? हम्म, यह समय पर निर्भर करता है। मैं एक बार मॉल रोड के पास ठहरा था और अपनी आधी शाम ट्रैफिक से बचते हुए बिताई, और तस्वीरें भी रात 9 बजे के बाद ही ले पाया जब माहौल थोड़ा शांत हुआ। मेरी राय में बेहतर विकल्प यह है कि आप थोड़ा ऊपर की ओर ठहरें या भीमताल चुनें और नैनीताल को एक दिन की यात्रा के रूप में करें। काठगोदाम ट्रांसफर सर्किट के आसपास बजट होटल आमतौर पर सीज़न में अगर पहले बुक कर लिए जाएँ तो बेसिक कमरों के लिए लगभग ₹1,200-₹2,000 से शुरू होते हैं, नैनीताल या भीमताल में मिड-रेंज जगहें अक्सर ₹3,000-₹6,000 के आसपास होती हैं, और झील-दृश्य वाले ज्यादा शानदार ठहराव इससे काफी ऊपर जाते हैं। वीकेंड और छुट्टियों वाले हफ्तों में कीमतें पागलों की तरह बढ़ जाती हैं, सच में।

  • सबसे अच्छे महीने: अप्रैल से जुलाई की शुरुआत तक, हालांकि जून के अंत में मानसून-पूर्व बारिश हो सकती है
  • क्या खाएँ: बन टिक्की, मोमोज़, जहाँ उपलब्ध हो वहाँ पहाड़ी थाली, और व्यू पॉइंट्स पर बहुत ज़्यादा मैगी
  • एक अच्छा कम-ज्ञात विचार: अगर नैनीताल बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ वाला लगे, तो भीमताल या सत्ताल के पास ठहरें।
  • स्थानीय सुझाव: सुबह-सुबह झील के किनारे टहलना शाम की अफरा-तफरी से कहीं बेहतर है

2) मसूरी या लैंडौर के लिए देहरादून - पुराने ज़माने जैसा, खूबसूरत, थोड़ा महंगा लेकिन इसके लायक#

लखनऊ से देहरादून एक और बहुत ही व्यावहारिक ट्रेन रूट है, और देहरादून स्टेशन से आप टैक्सी, बस या शेयर कैब लेकर सीधे मसूरी पहुँच सकते हैं। अब मसूरी इतनी मशहूर जगह है कि उसके बारे में लिखना थोड़ा जाहिर-सा लगता है, लेकिन लोग आज भी वहाँ क्यों जाते हैं, इसकी एक वजह है। गर्मियों में, जब मैदानी इलाकों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही होती है, तब लाइब्रेरी चौक या लैंडौर की तरफ की वह ठंडी हवा ऐसा महसूस कराती है जैसे किसी ने आपका मूड हाथ से रीसेट कर दिया हो। मुझे उम्मीद नहीं थी कि लैंडौर मुझ पर इतना असर डालेगा, लेकिन वह शांत सैर, पुराने घर, देवदार की खुशबू, सड़क के वे धुंधले मोड़... यार, वह सब आपके साथ रह जाता है।

यह कहा जा सकता है कि पीक सीज़न में मसूरी अब सस्ती नहीं रही। बजट कमरे मिल जाते हैं, लेकिन अच्छे वाले जल्दी बुक हो जाते हैं। बहुत ही बुनियादी ठहरने के लिए, वह भी मुख्य जगहों से दूर, लगभग ₹1,500-₹2,500 खर्च मानिए; अच्छे मिड-रेंज होटलों के लिए ₹3,500-₹7,000, और लैंडौर में बुटीक स्टे या व्यू वाली प्रॉपर्टीज़ की कीमतें काफी ज़्यादा जा सकती हैं। खाने-पीने के लिए बहुत विकल्प मिल जाते हैं, कैफ़े से लेकर साधारण उत्तर भारतीय भोजन तक। अगर आप माता-पिता के साथ जा रहे हैं, तो आसान पहुंच वाला होटल चुनें, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर चलना सुनने में रोमांटिक लगता है, जब तक कि सामान और खड़ी सीढ़ियाँ बीच में न आ जाएँ। सुरक्षा और पर्यटन ढांचा अब भी मजबूत है क्योंकि यह सबसे व्यस्त हिल सर्किट्स में से एक है, लेकिन इसी वजह से सीज़न में ट्रैफिक जाम आम बात है। संभव हो तो वीकडेज़ में जाने की कोशिश करें।

अगर आप लखनऊ से गर्मियों में ऐसी एक ट्रेन यात्रा चाहते हैं जो आसान भी लगे और थोड़ी सिनेमाई भी, तो देहरादून से मसूरी का सफर बेजोड़ है। बस शनिवार की दोपहर में वहाँ पूरी तरह शांत और एकांत मिलने की उम्मीद मत रखिए।

3) पटनीटॉप के लिए जम्मू तवी - अगर आप सामान्य हिल-स्टेशन वाली भीड़-भाड़ के बिना ठंडी हवा चाहते हैं, तो यह बहुत कम आंका गया विकल्प है#

लखनऊ के बहुत कम लोग गर्मियों के लिए पटनीटॉप की बात करते हैं, और मुझे लगता है कि यह थोड़ा नाइंसाफी है। जम्मू तवी तक की ट्रेन यात्रा लंबी है, लेकिन पूरी तरह संभव है, खासकर अगर आपको यात्रा को ही अनुभव का हिस्सा बनाने में आपत्ति न हो। जम्मू से आगे आप सड़क मार्ग से पटनीटॉप जाते हैं। वहाँ की ऊँचाई आपको गर्मी से राहत देती है, चीड़ के जंगल सचमुच सुकून देने वाले हैं, और ज़्यादा दिखावे वाले प्रसिद्ध हिल स्टेशनों की तुलना में यह जगह कम बनावटी लग सकती है। यहाँ “देखो, मैं छुट्टियाँ मना रहा हूँ” वाला दिखावा कम है, और असली शांति ज़्यादा। मुझे यह बात पसंद आई।

अब हाँ, इस रूट के लिए ज़्यादा समय चाहिए—आदर्श रूप से कम से कम 4 से 6 दिन। यह कोई जल्दी में किया जाने वाला वीकेंड प्लान नहीं है। लेकिन उन परिवारों के लिए जो ट्रेन से गर्मियों में थोड़ा अलग तरह की यात्रा करना चाहते हैं, यह बढ़िया विकल्प है। साधारण होटल और गेस्टहाउस लगभग ₹1,500-₹2,500 से शुरू हो सकते हैं, जबकि बेहतर रिसॉर्ट्स मौसम और दृश्य के अनुसार ₹4,000-₹8,000 की श्रेणी में जाते हैं। मुख्य जम्मू रूट पर मौजूदा यात्रा स्थितियाँ आमतौर पर सक्रिय हैं और पर्यटकों की नियमित आवाजाही रहती है, लेकिन पहाड़ों की ओर आगे बढ़ने से पहले मौसम और सड़क की जानकारी ज़रूर जाँच लें। साथ ही हल्के ऊनी कपड़े भी रखें। लखनऊ के लोग अक्सर मान लेते हैं कि “गर्मी मतलब सिर्फ़ सूती कपड़े,” और फिर शाम की ठंडी हवा में कांपने लगते हैं। मैं भी, एक बार। बहुत बड़ी गलती।

4) ट्रेन से हरिद्वार या ऋषिकेश - बिल्कुल ठंडा नहीं, लेकिन फिर भी गर्मियों में तरोताज़ा कर देने वाला एक बदलाव#

ठीक है, तो अगर आपकी गर्मियों की यात्रा की परिभाषा सिर्फ “हिल स्टेशन” है, तो हरिद्वार-ऋषिकेश शायद पूरी तरह फिट न बैठे। जाहिर है, वे मसूरी या नैनीताल से ज्यादा गर्म हैं। लेकिन मेरी बात सुनिए। लखनऊ से एक छोटी ट्रेन यात्रा के लिए, खासकर अगर आप नदी के दृश्य, योगा-टाउन कैफे, राफ्टिंग सीज़न की ऊर्जा, मंदिर दर्शन और पास के पहाड़ों तक पहुंच चाहते हैं, तो यह रूट बेहतरीन है। हरिद्वार के लिए ट्रेनें काफी मिल जाती हैं, और ऋषिकेश आगे का आसान सफर है। शुरुआती गर्मियों और बीच के मौसम में, गंगा के किनारे सुबह और शाम सचमुच सुकूनभरी लगती हैं। लखनऊ की सूखी गर्मी के बाद नदी के पास बैठने में कुछ ऐसा है जो सच में दिमाग को थोड़ा ठीक कर देता है।

ऋषिकेश खास तौर पर बहुत बदल गया है। अब ज़्यादा होस्टल हैं, ज़्यादा कैफ़े हैं, ज़्यादा डिजिटल नोमैड टाइप लोग हैं, और सिर्फ महिलाओं के लिए डॉर्म के विकल्प भी ज़्यादा हैं। अगर आप कम उम्र के यात्री हैं या दोस्तों के साथ सेमी-बजट ट्रिप कर रहे हैं, तो यह जगह बहुत अच्छी तरह काम करती है। ऑफ-पीक सीज़न या वीकडे में होस्टल बेड अक्सर लगभग ₹500-₹900 से शुरू हो जाते हैं, प्राइवेट बजट कमरे लगभग ₹1,200-₹2,500 के बीच मिल जाते हैं, और अच्छे बुटीक स्टे ₹3,500 से ऊपर तक जा सकते हैं। रिवर राफ्टिंग की उपलब्धता मौसम और सुरक्षा सलाहों पर निर्भर करती है, इसलिए स्थानीय स्तर पर ज़रूर पता कर लें, क्योंकि कभी-कभी नदी की स्थिति या नियमों की वजह से संचालन रोक दिया जाता है। और कृपया नदी को हल्के में मत लें। हर साल लोग अपनी क्षमता का ज़रूरत से ज़्यादा अंदाज़ा लगा लेते हैं, और उसका अंत अच्छा नहीं होता।

  • लखनऊ से 2-4 दिनों की त्वरित छुट्टी के लिए सबसे अच्छा
  • आध्यात्मिक, प्राकृतिक दृश्यों और रोमांचक गतिविधियों का शानदार मिश्रण
  • यदि समय हो तो इसे नीलकंठ, शिवपुरी, या एक और पहाड़ी ठहराव के साथ भी जोड़ा जा सकता है।

5) कालका तक ट्रेन से, फिर शिमला - थोड़ा लंबा, लेकिन यात्रा खुद ही आधा जादू है#

इस वाले के लिए प्लानिंग तो करनी ही पड़ेगी, इसमें कोई शक नहीं। लखनऊ से ट्रेन लेकर कालका पहुँचिए, फिर वहाँ से शिमला की ओर — या तो मशहूर टॉय ट्रेन से, अगर सीट मिल जाए, या फिर सड़क मार्ग से अगर समय कम हो। लेकिन अगर आपने यह रूट कभी नहीं किया है, तो ज़िंदगी में कम से कम एक बार तो करना ही चाहिए। गर्मियों में शिमला में भीड़ होती है, हाँ, लेकिन वहाँ उस क्लासिक पहाड़ी-शहर वाली वास्तुकला, शाम की सैर, पुराने कैफ़े, चर्च स्क्वायर का माहौल, और ठंडा मौसम भी मिलता है जो सचमुच मैदानों की गर्मी से एक सही मायने में राहत जैसा लगता है। टॉय ट्रेन वाला हिस्सा बहुतttt धीमा है, लेकिन अच्छे तरीके से। वह आपको बाहर देखने पर मजबूर करता है। जो आजकल हम जैसे करना थोड़ा भूल ही गए हैं।

मैं कहूँगा कि शिमला का असली मज़ा तब है जब आप बहुत ज़्यादा प्लानिंग न करें। रिज पर टहलें, सबसे भीड़भाड़ वाले हिस्सों से थोड़ा दूर निकल जाएँ, एक दिन कुफरी या मशोबरा की तरफ बिताएँ, और जब बादल घिर आएँ तो जो भी गरमागरम खाने को मिले, वही खा लें। सीज़न में मिड-रेंज होटल आमतौर पर ₹3,000-₹5,000 से शुरू होते हैं, बजट में इससे कम भी मिल सकता है अगर आप मुख्य केंद्र से थोड़ा हटकर ठहरें, और प्रीमियम हेरिटेज या व्यू वाले स्टे बहुत जल्दी काफ़ी महंगे हो सकते हैं। परिवारों के लिए, लिफ्ट एक्सेस के पास या सड़क संपर्क के थोड़ा नज़दीक बुकिंग करना बहुत मददगार रहता है, क्योंकि शिमला में सामान को चढ़ाई पर घसीटना बुरे मायने में चरित्र-निर्माण जैसा अनुभव है। साथ ही, सीज़नल पर्यटक दबाव की वजह से अब ऑनलाइन पहले से बुकिंग करना लगभग अनिवार्य हो गया है।

6) दार्जिलिंग की तरफ के लिए न्यू जलपाईगुड़ी मार्ग - लखनऊ से यह सबसे आसान नहीं है, लेकिन अगर आपके पास समय हो, तो कमाल है#

यह उन लोगों के लिए है जो गर्मियों में एक सही मायने में लंबी ट्रेन वाली छुट्टी चाहते हैं, सिर्फ एक छोटा सा ब्रेक नहीं। आप न्यू जलपाईगुड़ी की ओर ट्रेन ले सकते हैं और फिर सड़क मार्ग से दार्जिलिंग जा सकते हैं, या अगर बुकिंग और समय का साथ मिले तो टॉय ट्रेन वाले हिस्से को भी इसमें शामिल कर सकते हैं। क्या यह ज़्यादा दूर है? हाँ। क्या अगर आपको पहाड़ी मौसम, चाय के बागान, धुंध और वहाँ की अलग पहाड़ी संस्कृति पसंद है, तो यह मेहनत के लायक है? इसका जवाब भी हाँ है। और बहुत ज़्यादा हाँ। दार्जिलिंग का माहौल उत्तर भारत के हिल स्टेशनों से अलग है। खाना बदल जाता है, भाषा की लय बदल जाती है, सड़कों का एहसास अलग होता है, और अचानक आपकी गर्मियों की यह छुट्टी सिर्फ “किसी ठंडी जगह जाने” से कहीं बड़ा अनुभव लगने लगती है।

खर्च काफी अलग-अलग हो सकता है, लेकिन बजट गेस्टहाउस लगभग ₹1,500-₹2,500 से शुरू हो सकते हैं, जबकि आरामदायक मिड-रेंज होटल सीज़न में अक्सर ₹3,500-₹7,000 की श्रेणी में होते हैं। थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर चलें, क्योंकि रेल में देरी और पहाड़ी सड़कों का ट्रैफिक मिलकर सफर लंबा कर सकते हैं। साथ ही, यह रूट कम से कम 5 से 7 दिनों की यात्रा के लिए बेहतर है। अगर आप इसे बहुत जल्दी-जल्दी करेंगे, तो बादलों के आपकी खिड़की के पास तैरते हुए नज़ारे के साथ चाय का आनंद लेने से ज़्यादा समय सफर में ही बीतेगा। और सच कहें तो, यह थोड़ा दुखद होगा।

लखनऊ से कुछ छोटे लेकिन समझदारी भरे ट्रेन-यात्रा के आइडिया, जिन्हें लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं#

कुछ बीच के विकल्प भी होते हैं जो हमेशा उन चमकदार सूचियों में जगह नहीं बना पाते। बरेली या लालकुआँ की तरफ के मार्ग आपको प्रचलित नामों से आगे कुमाऊँ के इलाकों तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं। ट्रेन से चंडीगढ़ जाना, अगर शिमला बहुत भीड़भाड़ वाला लगे, तो सड़क मार्ग से कसौली या सोलन पहुँचने के लिए एक अच्छा प्रवेश-द्वार बन सकता है। यहाँ तक कि ट्रेन से अमृतसर जाना, भले ही वह बिल्कुल भी हिल स्टेशन नहीं है, सही समय-सारिणी के साथ किया जाए तो गर्मियों में एक बहुत संतोषजनक सांस्कृतिक यात्रा हो सकती है, और फिर लंबे कार्यक्रम में उसे डलहौज़ी या धर्मशाला के साथ जोड़ा जा सकता है। तो हाँ, लखनऊ से गर्मियों की हर अच्छी ट्रेन यात्रा को किसी एक सुघड़ श्रेणी में फिट होना ज़रूरी नहीं है।

मैं आमतौर पर इन जगहों के बीच कैसे चुनता हूँ#

यह व्यावहारिक हिस्सा है, और शायद सबसे उपयोगी भी। अगर मेरे पास सिर्फ 3 दिन हों, तो मैं हरिद्वार-ऋषिकेश या काठगोदाम की तरफ़ चुनूँगा। अगर मेरे पास 4 से 5 दिन हों, तो देहरादून-मसूरी आदर्श हो जाता है। अगर मेरे पास लगभग एक हफ्ता हो और मैं सच में किसी सुंदर प्राकृतिक जगह पर तरोताज़ा होना चाहूँ, तो शिमला की तरफ़ या जम्मू-पटनाीटॉप दिलचस्प विकल्प बन जाते हैं। और अगर मेरे पास पूरा धैर्य हो, ठीक-ठाक बजट हो, और लंबी ट्रेन यात्रा से कोई दिक्कत न हो, तो दार्जिलिंग सबसे सपनों जैसी जगह है। सरल। कमोबेश।

लखनऊ से गंतव्य मार्गके लिए सर्वोत्तमप्रति रात अनुमानित ठहरने का बजटयात्रा की अवधि
काठगोदाम - नैनीताल/भीमतालआसान पहाड़ी छुट्टी₹1,200-₹6,000+3-4 दिन
देहरादून - मसूरी/लैंडौरक्लासिक ठंडे मौसम की यात्रा₹1,500-₹7,000+3-5 दिन
हरिद्वार/ऋषिकेशछोटी दर्शनीय-आध्यात्मिक छुट्टी₹500-₹4,500+2-4 दिन
जम्मू तवी - पटनीटॉपकम चर्चित पारिवारिक पहाड़ी यात्रा₹1,500-₹8,000+4-6 दिन
कालका - शिमलाप्रसिद्ध पर्वतीय यात्रा₹2,000-₹8,000+4-6 दिन
एनजेपी - दार्जिलिंगलंबी दर्शनीय ग्रीष्मकालीन छुट्टी₹1,500-₹7,000+5-7 दिन

गर्मियों की बुकिंग के टिप्स, क्योंकि ट्रेन वाला रोमांस अच्छा लगता है लेकिन वेटिंग लिस्ट नहीं#

मई-जून के लिए जितना जल्दी हो सके बुकिंग कर लें। सच में। लखनऊ से प्रीमियम रूट्स बहुत जल्दी भर जाते हैं, खासकर वीकेंड पर चलने वाली ट्रेनों में 3AC और स्लीपर। अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो लोअर बर्थ और साइड-लोअर के कॉम्बिनेशन सबसे पहले गायब हो जाते हैं। ठहरने के लिए, मेरा अनुभव यह रहा है कि पहले रिफंडेबल कमरे बुक कर लेना बेहतर रहता है और फिर अगर ट्रेन के समय में बदलाव हो तो बाद में उसे एडजस्ट किया जा सकता है। उत्तराखंड और हिमाचल के गेटवे इलाकों में होमस्टे अब काफी बेहतर हो गए हैं, और सच कहूं तो कुछ तो सामान्य होटलों से भी कहीं ज़्यादा गर्मजोशी भरे लगते हैं। बस हाल की समीक्षाएं पढ़ें, पुरानी नहीं। कोई जगह जो 2 साल पहले अच्छी थी, वह अब अजीब तरह से उपेक्षित हो सकती है। ऐसा हर समय होता रहता है।

  • पहाड़ी रास्तों के लिए, गर्मियों के चरम मौसम में भी एक हल्की जैकेट साथ रखें।
  • स्थानीय टैक्सियों, पार्किंग क्षेत्र के चाय स्टॉलों और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों के लिए नकद रखें
  • छुट्टियों के मौसम में स्टेशन पर जल्दी पहुंचें, भीड़ काफी अव्यवस्थित हो जाती है।
  • कृपया सिर्फ ट्रेंडी कपड़े ही न पैक करें, अच्छी पकड़ वाले जूतों की एक जोड़ी भी पैक करें।

खाना, स्थानीय माहौल, और वे चीज़ें जो यात्रा को सचमुच असली महसूस कराती हैं#

एक वजह कि मैं आज भी ट्रेन से सफर को पसंद करता/करती हूँ, यह है कि रास्ते में खाने की संस्कृति धीरे-धीरे बदलती है, और आप उसे महसूस करते हैं। लखनऊ के अपने कबाब-और-कुलचा वाले माहौल से शुरुआत होती है, फिर स्टेशन की चाय, फिर नॉर्थ इंडियन थालियाँ, फिर पहाड़ी मैगी के स्टॉल, फिर मसूरी के कैफे पैनकेक्स, फिर ऋषिकेश में नदी किनारे नींबू सोडा... यह सब यादों का हिस्सा बन जाता है। कुमाऊँ में, अगर ठहरने की जगह पर ताज़ा स्थानीय खाना बनता हो, तो उसे ज़रूर चखिए। मसूरी-लैंडौर में सिर्फ कैफे का खाना ही मत खाइए, सादा और ठीक से बना खाना भी खाइए। ऋषिकेश में, हाँ, स्मूदी बाउल वगैरह मज़ेदार होते हैं, लेकिन सुबह-सुबह घाट पर टहलने के बाद गरम आलू पुरी? उसका कोई मुकाबला नहीं। कभी-कभी यात्रा का सबसे अच्छा खाना वह नहीं होता जो सबसे ज़्यादा इंस्टाग्राम-लायक हो। शुक्र है।

और अगर आप एक महिला के रूप में या दोस्तों के मिश्रित समूह के साथ यात्रा कर रही हैं, तो मैं कहूँगा कि ऊपर बताए गए गंतव्य लखनऊ से गर्मियों में जाने वाले अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित और आमतौर पर ज्यादा यात्रा किए जाने वाले मार्गों में शामिल हैं, खासकर मुख्य पर्यटक क्षेत्रों के आसपास। फिर भी, रात में सुनसान शॉर्टकट से बचें, जहाँ संभव हो कैब की जानकारी जाँच लें, और पहाड़ी रास्तों पर “भैया बस 5 मिनट है” जैसी बातों पर ज़्यादा भरोसा न करें। पहाड़ों में पाँच मिनट का मतलब 25 मिनट भी हो सकता है। आसानी से।

तो, लखनऊ से ट्रेन द्वारा सबसे अच्छी गर्मियों की यात्रा कौन-सी है?#

परेशान करने वाला जवाब है, लेकिन सच है — यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की थकान महसूस कर रहे हैं। अगर आप गर्मी से थके हुए हैं और तुरंत राहत चाहते हैं, तो काठगोदाम वाला इलाका सबसे आसान है। अगर आप मानसिक रूप से थके हुए हैं और धीमी सैर तथा ठंडी शामें चाहते हैं, तो मसूरी-लैंडौर सबसे बेहतर है। अगर आप नदी + आध्यात्मिकता + बजट में लचीलापन चाहते हैं, तो ऋषिकेश शानदार है। अगर आप वही पुराने विकल्पों से ऊब चुके हैं और कुछ थोड़ा अलग चाहते हैं, तो पटनीटॉप एक समझदारी भरा चुनाव है। और अगर आप चाहते हैं कि यात्रा खुद दिग्गज-सी महसूस हो, तो शिमला या दार्जिलिंग के रास्ते बड़े विकल्प हैं।

मैं, व्यक्तिगत रूप से? मैं बार-बार उत्तराखंड के रूट्स पर लौटता हूँ क्योंकि वे लखनऊ से व्यावहारिक हैं और बहुत ज़्यादा झंझट नहीं माँगते। लेकिन कभी-कभी, एक लंबी ट्रेन लेना और नज़ारे को धीरे-धीरे बदलते देखना — वही उस तरह का सफर है जो आपके भीतर रह जाता है। समझाना मुश्किल है। आप बस किसी तरह हल्के होकर लौटते हैं। भले ही आपकी ट्रेन लेट हो गई हो, आपकी पीठ में दर्द हो, और आपने कॉफी पर ज़रूरत से ज़्यादा खर्च कर दिया हो। फिर भी यह इसके लायक है।

खैर, अगर आप लखनऊ से अपनी अगली यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो वही रूट चुनिए जो आपके समय, बजट और धैर्य के स्तर के हिसाब से सही बैठे — सिर्फ वही नहीं जो ऑनलाइन ट्रेंड कर रहा हो। आमतौर पर यही बेहतर काम करता है, मुझ पर भरोसा कीजिए। और अगर आपको इस तरह के ज़मीन से जुड़े, भारतीय यात्रियों वाली शैली के ट्रिप आइडिया पसंद हैं, तो आप AllBlogs.in पर और भी ट्रैवल लेख देख सकते हैं।